भैरों बाबा (भैरव जी)
हे भैरव बाबा, देवाधिपति महेश्वर के साक्षात स्वरूप और अमर अवतार हैं। ब्रह्मा, विष्णु एवं भगवान् शिव के अनेक वरदान और अधिकार प्राप्त होने के कारण आप अन्य सभी देवों और ईश्वर के अन्य अवतारों से अधिक शक्तिशाली हैं। आप परम उदार, दयालु और भक्तवत्सल हैं। भगवान् कल्कि का नाम जुड़ने पर आप छोटे-छोटे साधारण संकल्पों से ही कल्कि भक्तों के बड़े संकटों को टाल देते हैं। भैरों बाबा उपचार स्वप्न जागृत वाणी एवं मानसिक अवस्था में होने पर
5 रुपये 2 बताशें या 20 रुपये 1 मीठा रोट शनिवार या रविवार अनुभवन, लक्षण और प्रार्थना यदि अनुभव में अघोरी, दुराचारी, तांत्रिक, अतृप्त प्रेत और शैतानी शक्तियाँ दिखाई दें, किसी तरह की दुर्घटना, खून-खराबा, चोरी, डकैती या आतंकवादी घटनाएं दिखाई पड़ें तो 5 रुपया 2 बताशे या 20 रुपये 1 रोट का संकल्प होता है।
* शिव पुराण के अनुसार इसके प्राकट्य की कथा इस प्रकार है: एक बार महर्षि सतुत्व की जिज्ञासा से सभी देव तथा ऋषिगण सुमेरू पर्वत पर ब्रह्मा जी के पास गए और उनसे ‘अव्यय तत्व’ के बारे में पूछा। ब्रह्मा जी ने स्वयं को ‘सर्वातिशायी परम तत्व’ रूप बताया। जब यह बात विष्णु भगवान् को मालूम हुई, तो उन्होंने ब्रह्मा जी को अज्ञानी कह कर अपने को ही परम तत्व के रूप में प्रतिपादित किया किंतु जब वेदों से पूछा गया तो उन्होंने शिव को ही सर्वश्रेष्ठ परम तत्व बताया। इस पर भी ब्रह्मा जी और भगवान् विष्णु ने माह वश उनके कथन का खण्डन कर दिया। उसी समय एक दिव्य तेज पुन्ज के मध्य एक नीली पुरूषाकृति प्रगट हुई, जिसे देखकर ब्रह्मा का पंचम सिर कोप से प्रज्जवलित हो उठा। ब्रह्मा ने कहा-चंद्रशेखर! डरो मत। पूर्व काल में तुम मेरे भाल स्थान से उत्पन्न हुए थे। मैने ही तुम्हारा नाम ‘रूद्र’ रखा था तुम मेरे पुत्र हो। अत: मेरी शरण में आ जाओ। ब्रह्मा जी की इस गर्वपूर्ण उक्ति से भगवान् शिव को बहुत क्रोध आया और उन्होंने भीषण विकराल पुरूष को प्रकट कर के कहा “काल की तरह शोभित होने के कारण तुम कालराज हो, भीषण होने के कारण भैरव हो, अत: तुम कालभैरव हो तुम दुष्ट आत्माओं का मर्दन करके तुम आमर्दक कहलाओगे, काशी के तुम अधिपति रहोगे”। भगवान् शिव से इन वरों को प्राप्त करके श्री भैरव ने अपनी वामांगुली के नरवाग्र से ब्रह्मा की उस अपराधी सिर को काट दिया। लोक मर्यादा की रक्षा हेतु शिव ने तदन्तर भैरव को ब्रह्मा हत्या से मुक्त होने के लिये कापालिक व्रत धारण करके वाराणसी में निवास करने का आदेश दिया। जहाँ वो कालभैरव के रूप में विराजमान हैं।
इसीलिये मंत्र शास्त्रों में भगवान् शिव के रोद्र रूप को भैरव कहा गया है, वेदों में उसे रूद्र कहा गया है। “जिसके भय से अग्नि एवं सूर्य तपते हैं, इन्द्र, वायु और मृत्यु के देवता अपने अपने कार्य में तत्पर हैं, श्रुतियां जिस सहस्त्रशीर्ष महाभयंकर वेद पुरूष का वर्णन करती है।” तंत्र शास्त्र में भी उसे ही भैरव कहा गया है।
2) यदि ऊपर लिखा 1 नं. वाला उपचार धीमा लगे और ऐसे लगे कि किसी ऐसी परेशानी ने घर और व्यापार को जकड़ लिया है जिससे बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिल रहा है, या एक के बाद एक परेशानी आती जा रही है, कलह और अशांति खत्म नहीं हो रही है अथवा जमीन जायदाद का विवाद नहीं सलट “निबट” रहा है तो हफ्ते में 6 दिन एक पेपर पर भैरो बाबा का नाम लिखकर पिन से 20 रुपये का नोट लगाकर चाहें तो उस पर अपनी परेशानी भी लिख दें, आप और आपका परिवार अपनी अपनी अलग अलग परेशानियां मानसिक अथवा बोलकर अन्त में कहें, हे भैरो बाबा भगवान् कल्कि जी के बताए अनुसार मैं बुधवार को आपको यह 20 रुपये और 2 रोट (मीठा परांठा थोड़ी सौंफ डालकर) अर्पण करूंगा तो इससे रास्ता मिलना शुरू हो जाएगा ........ अन्तोगत्वा सफल होंगे।
प्रार्थना: परेशानियाँ बताने के बाद प्रतिदिन एवं बुधवार को 4 रोट दक्षिणा के 20 रुपये के हाथ लगाते समय – हे भैरो बाबा, आज बुधवार के दिन मैं यह 20 रुपये 4 मीठे रोट संकल्प करके आपको अर्पण कर रहा/रही हूँ, इसे स्वीकार करें हमारी रक्षा करने वाली दैवीय शक्तियों को शक्ति प्रदान करें, हमें परेशान करने वाली कलियुग की आसुरी शक्तियों को उनका भाग देकर संतुष्ट करें, उनके लोकों में उन्हें अथवा जिसने हमें फाँसा है उन्हीं के पास वापिस भेजें। मुझे सपरिवार, स्वस्थ शरीर से सुखीभाव, वैभवतापूर्वक भगवान् श्री कल्कि जी का कार्य करना है। हमें रास्ता दीजिए।
3) यदि अघोरी, तांत्रिक,, शैतानी प्रेत शक्तियां अनुभव में प्रहार करते दिखाई दें, जादू टोना करते हुए दिखाई दें, यदि ऐसा लगे कि किसी ने हमारे घर-परिवार और व्यापार पर नजर लगा दी हैं तो शनिवार/रविवार को भैरों बाबा को शराब की एक छोटी बोतल (पऊआ) और 5 रुपये दक्षिणा के संकल्प और ऊपर बताई प्रार्थना के साथ चढ़ा देना चाहिए। पंडित जी यदि प्रसाद रूप में देते हैं प्रसाद न खुद (स्वयं) लें अथवा न घर लाएं मंदिर के बाहर ही बांट दें।
4) यदि ऐसा लगे कि शैतानी शक्तियों ने हमें चारों तरफ से जकड़ लिया है। घर की दीवार की दुश्मन हो गई हैा घर के कोने-कोने से नकारात्मक किरणें आती हुई दिखाई दें अथवा मालूम पड़ें तो 547 रुपये का विक्रम तांत्रिक के नाम से संकल्प करके शनिवार या रविवार के दिन भैरो बाबा को शराब और दक्षिणा के रूप में अर्पण कर देना चाहिये।
पंडित जी यदि प्रसाद रूप में देते हैं प्रसाद न खुद (स्वयं) लें अथवा न घर लाएं मंदिर के बाहर ही बाँट दें।
इससे यह स्पष्ट है कि भैरव जी के रूप में भगवान् शिव ने एक ऐसी शक्ति को प्रगट किया जो दैवीय और आसुरी दोनों शक्तियों पर समान रूप से शासन करती है। इसीलिए भगवान् कल्कि के 12 देवी-देवताओं के सुरक्षा कवच में भैरव बाबा का विशेष स्थान है। आसुरी शक्तियों के किसी भी प्रहार से अपनी रक्षा करने के लिए कोई भी कल्कि भक्त अपने अनुभव के अनुसार भगवान् कल्कि का नाम जोड़कर केवल 1 रुपया 2 बताशे, 20 रुपया, 1 मीठा रोट, या शराब की एक बोतल का भैरों बाबा के नाम से ज्यों ही संकल्प करता है। भैरों बाबा की दिव्य शक्तियां उसी समय जागृत होकर उस आसुरी शक्ति को उसका भाग देकर कल्कि भक्त की रक्षा करती है, उस भक्त को रक्षा करने वाली दैवीय शक्तियों को शक्तियां प्रदान करती हैं और उसे परेशानी से बाहर निकालती है।
नोट: आम धारणा है कि माँ वैष्णों देवी के दर्शन को जाने के समय भैरव बाबा का जो मंदिर है, वो रूद्र अवतार भैरव जी का है पर यह गलत है। वास्तव में वह मंदिर भैरव नाथ नाम से एक सिद्ध तांत्रिक भैरवनाथ योगी जो गुरू गोरखनाथ का शिष्य था। अपनी अपार शक्ति के अहंकार में उसने माँ वैष्णों देवी की शक्ति को ललकारा था, उन पर बुरी नजर डाली थी, अनेक अवसर देने के बाद जब माँ वैष्णों देवी ने उसका वध किया तब उसके सिर ने पुत्र रूप में माँ वैष्णों देवी से क्षमा याचना की। चूंकि वह एक महान तपस्वी था, माँ वैष्णों देवी ने उसे क्षमा किया और उसके कटे हुए सिर को अमरता प्रदान करके यह वरदान दिया कि उसके दर्शन और उपासना के बिना माँ वैष्णों देवी की दर्शन यात्रा पूजा अधूरी रहेगी इसीलिये हर भक्त माँ वैष्णों देवी के दर्शन करने के बाद भैरोनाथ के मंदिर का दर्शन करता है।
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