Objective
प्रश्न: श्री कल्कि बाल वाटिका क्या है?
उत्तर: भगवान श्री कल्कि जो त्रेता में राम बने, द्वापर में श्याम बने अब कलियुग में वह कल्कि रूप में आ रहे हैं। कल्कि बाल वाटिका एक ऐसा पवित्र स्थान है जहाँ राम और कृष्ण के सखा जो इस युग में जन्म लेकर आ रहे हैं, आ चुके हैं व जन्म लेकर आने वाले हैं, ऐसे बालक व बालिकाओं को कल्कि भगवान का सच्चा दोस्त बनाकर उनकी छुपी हुई प्रतिभाओं को खल-खेल में निखारा जाता है। स्कूलों में उमिल रही कांवेंट विद्या से जहाँ वह समाज में रोजगार पा सकेंगे वहीं श्री कल्कि बाल वाटिका में खेल-खेल में वह हमारे हिंदू धम्र, संस्कारों व भारतीय संस्कृति की गरिमा से अवगत होंगे और फिर वह बनेंगे सच्चे भारतीय, एक सच्चे हिंदू। फिर वह पाश्चात्यता के रंग में रंगकर अपनी संस्कृति व संस्कारों को नहीं भूल सकते।
यह प्रक्रिया बाल वाटिका में हर महीने के एक रविवार को 3-4 घंटे की कक्षा में हवन, पूजा, योगा, प्रेरणादायक कहानियों, प्रश्नोत्तरी, भजन, श्लोक प्रतियोगिताओं के माध्यम से सिखाई जाती है।
प्रश्न: किस उम्र तक के बच्चे बाल वाटिका में आ सकते हैं?
उत्तर: 3 साल से 15 साल तक के बच्चे यहाँ आते हैं। युवा बच्चे नई खुल रही बाल वाटिका की शाखाओं में कार्यशालाएं भी करवाते हैं।
प्रश्न: क्या यहाँ आने से बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ेगा?
उत्तर: बिल्कुल नहीं महीने में एक बार वो भी रविवार के दिन खेल-खेल में जो संस्कार बच्चे यहाँ से सीख कर जाते हैं वह न केवल उनका नाता श्री हरि से जोड़ते हैं वरन हनुमान जी व माँ सरस्वती सच्चे मार्गदर्शक के रूप में उनका पथ उज्जवल करते हैं। अगले महीने की प्रतीक्षा में बच्चे पूरा मास उत्साह व उमंग से भरे रहते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो यह अपने जीवन में ऊँचे लक्ष्यों की ओर अग्रसर होने लगते हैं। शास्त्रों के अनेकों उदाहरणों से यह ज्ञात है कि नारायण के साथ रहने वालों कि चिंता तो नारायण को ज्यादा होती है।
प्रश्न: मैं कल्कि बाल वाटिका की सदस्यता कैसे ले सकता/सकती हूँ?
उत्तर: बहुत आसान है आप अपने घर के पास के बाल वाटिका सेंटर की संयोजिका या संचालिका से संपर्क करके अपना नाम रजिस्टर करवा सकते हैं। इसके लिए आपको कोई शुल्क नहीं देना होगा।
प्रश्न: यदि मैं भी अपने क्षेत्र में कल्कि बाल वाटिका खोलना चाहूँ तो इसकी क्या प्रक्रिया है?
उत्तर: आप हमारी मुख्य ब्रांच में चाँदनी चौक से संपर्क करके 12 महीने का कल्कि बाल वाटिका करिकुलम प्राप्त कर सकते हैं अथवा हमारी वैबसाइट से डाऊनलोड कर सकते हैं। जिसमें हर महीने बाल वाटिका करने की विधि व गतिविधियाँ उपलब्ध है।
कल्कि बाल वाटिका में हवन, पुरस्कार वितरण व प्रसाद के आयोजन में खर्च होने वाला रुपया भगवान श्री कल्कि के शुभ के खजाने से किया जाता है।
प्रश्न: क्या मैं बाल वाटिका में करवाई जाने वाली नियमित गतिविधियाँ जान सकता/सकती हूँ?
उत्तर: प्रत्येक बाल वाटिका की शुरूआत भगवान को तिलक के साथ हनुमान जी को गुरु बनाकर कल्कि भगवान की आठ बार की नमस्कार के साथ होती है।
1 घंटा – हवन एवं कल्कि महामंत्र मुकाबला
½ घंटा – भंडारा
1 घंटा – विभिन्न गतिविधियाँ
अंत में आरती एवं फल समर्पण करवाया जाता है।
प्रश्न: श्री कल्कि बाल वाटिका का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: कल्कि बाल वाटिका में आने वाले बालक-बालिकाओं का सर्वांगीण विकास। आध्यात्मिक, सामाजिक, भावनात्मक व व्यावहारिक ज्ञान देकर बच्चों की चहुमुखी प्रतिभा का विकास करना जिससे वह विवेकानंद की भांति समाज व धर्म का कार्य करते हुए निरंतर प्रगति करते हुए आगे बढ़ते चले जाएं।
प्रश्न: धर्म और इन सभी गुणों का आपसी मेल कैसे हो सकता है?
उत्तर: धर्म के प्रति उदासीन होने से चरित्र का पतन होता है। आधुनिक समाज में जो नित नए अपराध पैर पसार रहे हैं उसका मुख्य कारण धर्म व संस्कारों के प्रति उदासीनता ही है।
प्राचीन भारतीय संस्कृति में धार्मिक जीवन शैली से हमें प्रत्येक क्षेत्र में विजय हासिल थी। लेकिन पाश्चात्यता के विष ने धीरे-धीरे हम सभी को अपनी जकड़ में ले लिया है। अत: इससे बचने के लिए हमें धर्म के पात्र में संस्कृति का अमृत लेना ही होगा।
प्रश्न: मुझे लगता है मैं कल्कि बाल वाटिका को समझने लगी हूँ?
उत्तर: यह बहुत अच्छा है। आपका कल्कि बाल वाटिका की शाखा में हार्दिक स्वागत है।