Pitra Pitrani Tarpan
पितृ पित्री तर्पण
तर्पण के लिये जौ, काला तिल और जौ न मिलने पर चावल मिला लें। दाहिने हाथ में जल के साथ लेकर अंगूठे और तरजनी के बीच में दो बार गिरा दें। जिनके नाम से तर्पण करना है उनका नाम बोलें।
1) अमुक का श्राद्ध 2) अमुक का श्राद्ध समर्पण
प्रार्थना :- 1) हे देवी स्वधा आपको प्रणाम। मैं अपने पितरों के नाम से संकल्प करके यह तर्पण कर रहा हूँ। इसे स्वीकार करें, उन्हें प्रदान करें। इस तर्पण को प्राप्त करके वह तृप्त और संतुष्ट हों, मुझ पर और मेरे परिवार पर दया करें, हमें सुख सौभाग्य, आयु और आरोग्यता का दान दें। मुझे कल्कि जी की प्रसन्नता का कार्य करना है।
2) मैं नरक में रहने वाली अशांत, असंतुष्ट और अतृप्त आत्माओं, पितृ शक्तियों (जो वायु मण्डल में मौजूद मेरे वंशज अथवा दूसरों के वंशज जिनको पहले मेरे से स्नेह/लगाव है अब वो मुझ से और मेरे परिवार से किसी भी तरह का कोई भाग चाहती है) के नाम-अनामिका से तर्पण कर रहा हूँ, इसे स्वीकार करें, उन्हें वापिस भेजें वहाँ से आने के उनके सारे रास्ते बंद करें, उनके हर देव-दैविक, शारीरिक, भौतिक और मानसिक प्रहारों से मेरी, मेरे परिवार, घर और व्यापार की रक्षा करें। मुझे कल्कि जी की प्रसन्नता का अति विशिष्ट कार्य करना है।