Durga Maa Yoginiya
दुर्गा माँ की योगिनियाँ
हे दुर्गा महारानी, मैं 20 रुपये आपकी योगिनियों की दक्षिणा और प्रसाद के निमित्त संकल्प करके आपको अर्पण कर रहा/रही हूँ, इसे स्वीकार करें। आपकी योगिनियाँ जो इस संसार में बीमारी फैलाती हैं। क्रूर ग्रहों के प्रभाव, आसुरी शक्तियों के प्रहार, इस जन्म और पूर्व जन्मों के संचित पापों के अनुसार मनुष्य को बीमारी और दु:ख प्रदान करती हैं, कर्मों का भुगतान लेकर तबाह और बर्बाद करती हैं।
1) आपकी योगिनियों और सम्बन्धित आसुरी शक्तियों को मुझ से जो भी चाहिए इस संकल्प के द्वारा उन्हें प्रदान कर तृप्त और संतुष्ट करें।
क) प्रगट रोगों का विवरण।
ख) अनुभव में कल्कि जी द्वारा जो रोग दिखाए जा रहे हैं।
ग) किसी भी छुपे हुए असाध्य रोग के जहर का नाश करें।
मुझे आयु और आरोग्यता प्रदान करें। स्वस्थ शरीर से सुख, शांति वैभव, और ऐश्वर्य के साथ जीते हुए मुझे कल्कि जी के प्राकट्य का अति विशिष्ट कार्य करना है।
2) यदि अनुभव में हिंजड़े दिखाई देते हैं, किसी के विवाह में बाधा है, वैवाहिक जीवन में कलह और अशांति है, बच्चे के गर्भ में न टिकने (Formation) में परेशानी है, विवाह टूटने के अनुभव आ रहे हैं तो भी दुर्गा जी की योगिनियों का संकल्प किया जाता है।
3) यदि कोई बीमारी पीछा नहीं छोड़ रही है, भीतर ही भीतर हमारे शरीर को घुन की तरह खा रही है तो 20 रुपये और 14 रुपये पराँठे का संकल्प करके दुर्गा माँ के मन्दिर में उनके चरणों में प्रार्थना के साथ चढ़ाना चाहिए।
नोट: योगिनियों के प्रसाद में पूड़ी/कचौड़ी-सब्जी और खुले पैसे गरीबों/भिखारियों में बाँटना चाहिए।
विशेष: जहाँ 20 रुपये संकल्प के हाथ लगवा रहे हैं, का निष्कर्ष है कि 15 रुपये अथवा 10 रुपये का प्रसाद बाकी 5 रुपये अथवा 10 रुपये दक्षिणा में चढ़ा दें।