जय राम हरे जय कृष्ण हरे, अब प्रगटो कल्कि रूप धरे
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्। धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥
Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 7-8
सन् 1989 में श्री कल्कि बाल वाटिका की स्थापना श्री कल्कि भगवान की कृपा से व गुरूदेव के आर्शीवाद से बी-2, बहादुर अपार्टमेंन्ट, दिल्ली-110 054 के एक कमरे में 9 सदस्यों के साथ प्रारम्भ हुई थी। श्री कल्कि बाल वाटिका समाज को कलियुग के युगावतार भगवान श्री कल्कि के अवतार के विषय में अवगत व जागरूक करना चाहती है तथा भारतीय संस्कृति, संस्कार व सनातन धर्म का रोपण आज के परिवेश में यहाँ के बालक व बालिकाओं में करना चाहती है, जो कि हमारे भारतवर्ष की जड़ है।